“कोई”

जहाँ कब्रे होती है वो कब्रिस्तान कहलाता है।
मेरा दिल भी एक कब्रिस्तान है “सरिता”
दफ़न है वहाँ पर कोई।
#सरितासृजना

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“निश्चल हँसी”

रास्तों में से जब रास्तें निकल आते है,
लम्बे फ़ासलें आसानी से तय हो जाते है
निराशा से जब उम्मीद की किरण निकले,
ज़िदगीं उसी क्षण सभंल जाती है।
खामोश होंठो से निकलकर कोई
अनजान खुशी ,चेहरे पर बिखर जाती है।
एकाकीपन भरने लगे जब कोई निश्चल हँसी
संम्पुर्णता का एक अहसास करा जाती है।
#सरितासृजना

चंद टुकड़े

1)थोड़ा-थोड़ा रोज तुम्हें भूलते रहे
मगर कमब्खत
उसी बहाने तुम रोज याद आते रहे।

2)”गालिब” तेरी शायरी में तेरा दर्द झलकता है
तुझसे दो-चार होने को अभी मेरा कद बहुत छोटा है।

3)झूठ का सिक्का बाजारों में खूब चलता है “सरिता” क्योंकि
सच का ज़मीर नोटों के बीच सोता है।

#सरितासृजना

“मौत”

“मौत तो कहते है एक सच्चाई है,

“मौत” को देख ज़िदगीं घबराई है।

जब यह आती है किसी को नही भाती है,

“मौत” की यह एक कड़वी सच्चाई है।

यह ना देखे नवजात का रुदन,

यह क्या जाने बूढ़ों की आँख भरभराई है।

अटल है जल्दी टलती नही ये,

लौटकर सदा वापस आई है ये।

यही है जो फर्क नही करती कभी ,

अमीर-गरीब को सदा एक सी आई है।

कलयुग हो, सतयुग हो,कोई भी युग हो,

युगों-युगों इसकी पंरपंरा चली आई है।

डरना क्या आओ “सरिता”,इसका सम्मान करें,

यही अपनी है दोस्तों, बाकी दुनिया तो पराई है।

#सरितासृजना

“कठुआ की परी”

देखो आज फिर से हवाओं में मचा कोलाहल,
मानवता को “मानवरुपी पशु” ने किया हलाहल।

किस की पीठ थपथपाऊँ, किस टीले चढ़ नारा लगाऊँ
किसको मैं धैर्य बधाऊँ, किसका लहू पी जाऊँ।

कर लूँ कैद खुद को मैं तू ही बता,
या,
किस देवी को बोल मैं तेरी बलि चढ़ाऊँ

कितने आसूँ पोछूँ, कितने दर्द को झेलूँ,
या,
आसूँओं के समंदर में तुझको डुबोऊँ।

शांत रहूँ मैं, अब भी शांत रहूँ मैं!!
या,
चीत्कारों से गगन-धरा को हिलाऊँ ।

मूक दर्शक बनी रहूँ क्या मैं “सरिता”
या,
झकझोर कर सोये मानव को जगाऊँ।
#सरितासृजना

न्याय

जब न्याय शब्द दिमाग में आता है तब दिमाग में यह बात जरुर आती है की यह सब के साथ समान हो चाहे वो राजा हो या रंक।काले हिरण मामले में सलमान खान को सजा पर उनके फैन बवाल मचा रहे है।क्या यह सही है? नही , क्या फैन्स इस बात से सहमत है की मूक पशु, पक्षीयों का शिकार (हत्या) करना सही है? हाँ वो लोगों के लिए बेहतर काम कर रहे है पर इससे उनके किए गए अपराध को नजर अंदाज नही करना चाहिए। हम इंसान पशुओं को कमतर समझते है। उनकी जान की कोई कीमत नही समझते।इस धरती पर इंसान ताकतवर कहलाता हैक्योंकि उसके पास दिमाग की शक्ति है।पशुओं के पास नही है।कभी इन्हीं इंसानों ने सोचा अगर उनके पास(पशु) दिमागी शक्ति होती तो कौन ज्यादा ताकतवर होता ? जब इंसान, इंसान का शिकार(हत्या)करता है तब दंड़ित होता है। तो जानवरों की हत्या पर दंड़ क्युँ न हो? हर एक फैन अपने ज़मीर से यह सवाल पुछे। आप जिसे पंसद करते है क्या उन्हें किसी की जान लेने का हक है? हमारी(इंसान)की जान अनमोल है और पशुओं की जान का कोई मोल नही!!

पंसद और सर्पोट का मतलब यह नही होना चाहिए कि आप आँख से यह देख ना पाए की क्या हुआ था?                       पंसद का मतलब यह भी नही होना चाहिए कि आपका दिमाग यह न तय कर पाएँ की न्याय क्या है?                        शिकार की जगह अगर हम हत्या शब्द पर गौर करें तभी इस मुद्दे की गंभीरता को समझ पायेगें।                                    बिशनोई समुदाय ने यह लड़ाई सालों लड़ी । यह समाज को एक संदेश देता है जान सबकी बराबर है अगर, तो न्याय भी बराबर का होना चाहिए चाहे वो कोई भी हो।

सलमान खान हमारी पंसद में भी शामिल है पर न्याय पंसद से बड़ा और ऊँचा होता है ।

सुनो सखी!!

सुनो सखी एक बात सुनाऊँ,
ध्यान लगाकर सुनना,
जरा कान लगाकर सुनना।

धमनियों में अब कहाँ यहाँ रक्त बहता है,
भष्ट्राचार हर एक नस-नस में पलता है,
आरक्षण भी अब दिमागों में ही रहता है,
बंद,हिंसा, तोड़फोड़ का धंधा अच्छा चलता है।

किताबें कौन यहाँ अब खोलकर पढ़ता है,
इंटरनेट,मोबाईल पे आजकल सबकुछ चलता है,
चीखों, चिल्लाओं नेता और मीडिया सबकुछ सुनता है,
कुछ देर तमाशा बाद कोई र्फक नही पड़ता है।

कौन है जो यहाँ किसी की सुनता है,
आम-आदमी इसी लड़ाई में भुनता है,
किसको पड़ी किसकी बहन, किसका भाई मरता है
सालों से मेरा देश ऐसे ही चलता है।

सुनो सखी एक बात सुनाऊँ,
कान लगाकर सुनना,
जरा ध्यान लगाकर सुनना।

#सरितासृजना