“चल”

चल उठ ,कभी तो चल,

कभी तो सफ़र पर निकल,

रास्तों पर ना इंतजार कर,

क्या पता कोई मँजिल ,

तेरा रास्ता निहारती हो।

#सरितासृजना

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ख्वाब

जी लेने दो मुझको भी ख्वाबों में,

हकीकत में तो हर कोई जीता है,

उधड़ी हुई पुरानी यादों के लिबास को,

मन तनहाईयों में अक्सर, अकेले सीता है।

#सरितासृजना