“दिल”

ना सुनाओं किसी शायर का कोई शेर मुझको,
कि मेरा दिल भी शेर कहने को धड़कता है।
सुनकर किस्से-ए-बँया हाल उनका यारों,
मेरा “दिल”भी कुछ कहने को तड़पता है।
#सरितासृजना

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रंग

हास्य के “रंग” मैं बिखेर नही सकती,
मुझको गम की काली चादर से इश्क है।
होगा उनको नाज़ अपनी खोखली मुस्कुराहटों पर,
मुझको अपने नमकीन अश्कों पर फ़क्र है।
#सरितासृजना

विचार (thought)

हर एक व्यक्ति के सोचने और समझने की क्षमता अलग-अलग होती है।सबके अपने मापदंड होते है।सहमति न मिले तो यह न समझे आप गलत है।नकारात्मक सोच हमारे निर्णय को प्रभावित करती है।पर हम सही है यह तय करने से पहले सारे पहलुओं पर गौर जरुर करें।

#सरितासृजना

“उसने कहा था”

अधपके बालों को अब भी सँवारती हूँ मैं,
“उसने कहा था” तुम्हारे बाल बहुत खुबसूरत है।

ऐनक उतार अपनी आँखों को दर्पण में
अब भी निहारती हूँ मैं,
“उसने कहा था” तुम्हारी आँखे बहुत खुबसूरत है।

उभर आई चेहरे पर झुर्रिंयाँ
जिन्हें छुपाने की अब भी कोशिश करती हूँ मैं,
“उसने कहा था”तुम्हारा चेहरा बहुत खुबसूरत है।

मुकाम हासिल नही  कोई,बनाने की अब भी कोशिश करती हूँ मैं,
“उसने कहा था” तुम्हारी पहचान बहुत खुबसुरत है ।
#सरितासृजना

“संग्राम”

मेरा देश जाति, धर्म और आंदोलनों में घुटकर जी रहा है,
संविधान, न्याय और कानून पता नही कहाँ सो रहा है।
अभिव्यक्ती की आजादी समय की माँग है,
अपने देश की छवि पर कालिख पोतना कहाँ का न्याय है?
वीरता का ये ऐसा किस तरह का “संग्राम” है!
समाज का हर हिस्सा आज बड़ी तबियत से मौन है!!
सोचना होगा हम में और आतंकवादिओं में कुछ तो जरुर समान है।
ये जहर फैलानेवाले किस धरती के विद्ववान है?
दुनिया में मेरे देश का सर नीचा करनेवाले ये कैसे पहलवान है?
#सरितासृजना

विचार thought

कभी-कभी आप जब बहुत खुश होते है तब तय नही कर पाते है क्या करें।
कभी-कभी जब आप बहुत दुखी होते है तब भी आप तय नही कर पातें हैं की क्या करें।
#सरितासृजना