“अभिव्यक्ति”

1) मैं पीर पराई कैसे जानूँ,
जब मैंने सौ-सौ नीर बहाये है।
पग-पग काँटे हरपल शोले,
दुनिया ने मेरे कदमों तले बिछाये है।

2)वो हाथ कभी मिला नही,
जो सशक्त सहारा दे सके।
वो शब्द कभी सुने नही,
जो मन को किनारा दे सके।

#सरितासृजना

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“समय लगेगा”

बहुत बिखर-बिखर गई हूँ आजकल,
खुद को समेटने में अभी, थोड़ा समय लगेगा।
सुख-दुख के धागों में मन उलझ गया है,
उसे सुलझने में अभी, थोड़ा समय लगेगा।

बदल गई है परिस्थितियाँ ना जाने क्यूँ आजकल,
स्थितियों को स्थिर होने में अभी, थोड़ा समय लगेगा।
अट्टहास करती है मुझपर मेरी असफलताएँ आजकल,
प्रयासरत हूँ ,सफल होने में मुझको अभी, थोड़ा समय लगेगा।

नित नये-पुराने भाव नजर आते है मन के दर्पण में आजकल,
धूमिल पड़ी छवि को स्वच्छ होने में अभी, थोड़ा समय लगेगा।
बदरंग लगने लगे है खुशियों के चित्र आजकल,
उनके सतरंगी रंगो को निखरने में अभी, थोड़ा समय लगेगा।

क्या प्राप्त है? किसकी आस है? समझ नही पा रही आजकल,
ऐ भाग्य तेरे दिए में संतोष कर जीने में अभी, थोड़ा समय लगेगा।
विश्वास-अविश्वास मुख ताक रहे एक दूजे का आजकल,
आँख मूँद इनपर आश्वस्त होने को मुझे अभी, थोड़ा समय लगेगा।

कर रही दुविधाएँ तांडव मेरे विचारों के समक्ष आजकल,
मेरी सोच के परिर्वतन में दोस्तों ना जाने अभी,
कितना समय लगेगा।
मंद पडती जा रही है अभिलाषाएँ आजकल,
हताशा को दूर करने में अभी, थोड़ा समय लगेगा।

जीवन की राह लगने लगी है कठिन आजकल,
सरलता से जीने में “सरिता” तुमको ना जाने अभी, कितना समय लगेगा।

#सरितासृजना

“मै स्त्री”

मुझको प्यास उस एक बूँद की जो मेरी तृष्णगी मिटायेगी,

स्त्री हूँ मैं, कैसे कहूँ उन शब्दों को;कहते हुए क्या मुझको लाज ना आयेगी?

बाँधा गया है मुझको शील के गहरे धागों से,तोड़ दूँ अगर उन धागों को देखना इक दिन, ये दुनिया कितना शोर मचायेगी।

जो मैं शालीनता की मूरत बनकर रहूँ सदा मंदिर,मस्जिद,गुरुद्वारों में मेरी सूरत पूजी जायेगी।

मूक रहना पंसद लोगों को मेरा चाहे हो घर, गली,चौबारा,चीख लूँ चाहे जितना, मेरे आसूँओं की बारिश पंरपराओं की आग बुझा ना पायेगी।

मखमली सपने मेरे कई बार ध्वस्त हुए है,उनकी घोषणाओं को हर बार तो मेरी चिता जला ना पायेगी।

यह संसार कदम-कदम पर निरखता-परखता मुझको,मेरी कलम कभी खुद की व्यथा किसी को सुना ना पायेगी।

घुटकर रह जाती है कई बार,कोई बात मेरे हृदय में,भावनाएँ चाहकर भी मेरी ,कभी आजाद हो ना पायेगी।

शक्ति और ममता का ओज मुझमें भरा,फिर भी ना जाने क्यूँ मैं असहाय हूँ, इस प्रश्न का उत्तर, ये दुनिया सदियों तक दे ना पायेगी।

#सरितासृजना

प्यार अगर वक्त पर ना मिले तो गम ना कर
उसकी ज़िदगीं में अहमियत कम ना होगी
ज़श्न रातों को मना या दिन में कर,
चिरागों में रोशनी कभी कम ना होगी।

उल्फत है तेरी सच्ची अगर तो सब्र कर,
दिल से निकली हर दुआ आखिर में कबूल होगी,
ज़िस्म से जाँ निकल जाये अगर कहीं,
दिल की धड़कन किसी भी सूरत धड़कना बंद ना होगी।

ज़माने की रुसवाईयाँ सहते जाना है,
तुझसे मिलने की आरज़ू किसी भी सूँ कम ना होगी।
लोग कहते है मुझको दीवाना पता नही सच क्या है,
तुझको देखने की हसरत मेरी कभी भी कम ना होगी।

हर शै तेरी तरफदारी है करता दिन और रात,
वादा है ऐ दोस्त, तुझको याद कर आँखें अब कभी नम ना होगी।
सुर्खियाँ होठों की मौसम को देख बदल गई,
भरोसा है मुझको इन लबों की हँसी किसी भी दम कम ना होगी।
#सरितासृजना

“विड़बना”

ये कैसी विड़बना है जीवन की,
मरनेवालों के साथ मरा भी नही जाता,
खोनेवालों के साथ खोया भी नही जाता,
मगर ये सच है यारों,
अपनों के बगैर जिया भी नही जाता।
#सरितासृजना