“ढुँढ़ना”

तुझको भूल रही हूँ ,खुद से पूछ रही हूँ,
तेरे खो जाने में “सरिता”,मैं खुद को क्यूँ ढुँढ़ रही हूँ।
#सरितासृजना

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“आज ये बारिश”

1) क्यों है शोर हवाओं में,
बूँदों ने तो बवाल ही मचाया है।
बिजलियों के क्या कहने,
क्षण-क्षण आकर मुझको डराया है।

2) आज ये क्या हुआ मौसम को,
घन है छाये काले-काले।
कभी मेघ डराता मुझको,
कभी बूँदें पास बुलाती मुझको।
कभी बिजलियों से जी घबराता,
कभी छप्प-छप्प करने को मन ललचाता।
#सरितासृजना

चंद टुकड़े

1) इक आग तेरे सीने में भी है,
तपिश मैंने महसूस की है,
तुझे माचिस की क्या ज़रुरत।

2)अपनी क़ाबलियत से कभी मुलाकात नही हुई,
वर्ना हमारा नाम भी शुमार होता,
दुनिया के “क़ाबिलों” में।

3) कभी अपने दर्द के साथ आकर फुर्सत में मिल,
गर मैंने दिया तो उस दर्द की हकदार मैं भी हूँ।

3)अपने दर्द के साथ तू जी ले ऐ दोस्त,
कोई और तेरे साथ ना हुआ तो क्या हुआ।
#सरितासृजना

दर्द के छाले

मेरी खुबसूरत हँसी के पीछे छिपे,

दर्द को तू समझ ना पायेगा।

दिल को मेरे आ जाय सुकुँन ऐसी कोई,

दवा तू मुझको कभी दे ना पायेगा।

लाजमी तो नही हर तकलीफ बाँटी जाय,

आँसू के एक-एक कतरे का हिसाब रखा जाय।

क्या हुआ जो मेरी नजर,हर नजारे में उसको ढुढ़ँती है,

मेरी साँस उसको अपनी साँसों में महसूस करती है।

सीने में उठे तूफानों को कैसे मैं समझाऊँ ऐ “सरिता”,

छाले जो पड़ गये मन की हथेली पर,उसे किसे दिखाऊँ मैं।

#सरितासृृजना

विचार(thought)

हम जिनसे प्यार करते है, कितना प्यार करते है,

ये हम तब तक नही बता सकते जब तक वो हमारे साथ है।

हमें खुद ये हकीकत उनके खो जाने के बाद पता चलती है।

कोशिश करें जिसे प्यार करते है, वो कभी ना खोये।

#सरितासृजना

“मेरी वेदना”

असर्मथ हूँ आज मैं अपनी वेदना कह पाने में,

कैसे समझूँ मूक और मौन की भाषा,

इंसान हूँ शब्द और हाव-भाव ही पहचान पाती हूँ,

तेरी तकलीफ, तेरा दर्द और तेरा एकाकीपन ,

समय रहते जो समझ जाती, तो आज यूँ ही तुझे ना खो जाती।

महसूस हुआ है आज ये ,मनुष्य कहता है वो सब कुछ जीत सकता है, 

फिर क्यूँ ,आज मेरा आँचल तेरे स्पर्श से खाली है 

तेरी साँसों को अब न महसूस कर पाऊँगी मैं कभी।

कैसे बताऊँ दुनिया को , कैसे समझाऊँ,

आज मेरे ममत्व का एक छोटा सा हिस्सा खाली-खाली है।

लिखने का मन नही आज ऐ मेरी दोस्त (कलम) ,

सच बता ,

मेरी भावनाओं को क्या तेरे लिखे शब्द, कागज पर उकेर पायेगें ?

जिन्होंने ना सहा होगा कोई भी दर्द जीवन में,

क्या वो मेरे इस बेपनाह दर्द को समझ पायेगें।

(प्रिय दोस्तों आप सब सिर्फ इस रचना को पढ़ लीजीए बस।कोई likes नही चाहती।)

#सरितासृजना

“जय हिन्द”

कण-कण में भारत गूँज रहा,

नस-नस में हिन्द की रवानी है,

बच्चा-बच्चा “जय हिन्द” का नारा लगा रहा,

क्षण-क्षण के इस,ये धरती-गगन भी सानी है।

जय हिन्द दोस्तों!!

#सरितासृजना