विचार (thought)

1) अतीत को भुलाकर
वर्तमान में जिएँ
भविष्य को स्वीकार करें।

2) माँगे हुए सम्मान में और
मिले हुए सम्मान में
बहुत फर्क होता है।
माँगी गई चीज भीख होती है
मिली हुई चीज वरदान होती है।

#सरितासृृजना

पानी

अंबर से बरस रहा है देखो “पानी”।

इस प्यासी धरती की प्यास बुझा रहा है देखो “पानी”।

जीवन में अपनी महत्ता को समझा रहा है देखो “पानी”।

इंसा को कद्र नही उसकी इस बात को भी बता रहा देखो “पानी”।

कमी मेरी हो जायेगी तब तरसोगे ये भी जता रहा है देखो “पानी”।

सहेज लो मुझे ,संचय कर लो मुझे बार-बार यही दोहरा रहा है देखो “पानी”।

मुझसे ही जीवन है ये ना भुलो, ऐ इंसानों हर बार यही याद दिला रहा है देखो “पानी।”

#सरितासृजना

“ये मुश्किलें”

मुझको बडा परेशान कर जाती है
जिदगीं की ये मुश्किलें
क्या बताऊँ दोस्तों , मुझको
कितना हैरान कर जाती है ये मुश्किलें।

मुस्कुराहटों पर जब देखो तब
मेरे आकर ,पहरे लगा जाती है ये मुश्किलें
क्या बताऊँ दोस्तों ,मुझको
मेरी नींद से हर रात जुदा कर जाती है ये मुश्किलें।

मेरी खुशियाँ तरस जाती है मुझको
उनको कोसों दूर मुझसे कर जाती है ये मुश्किलें
क्या बताऊँ दोस्तोँ ,मुझको
भीड़ में अक्सर अकेला सा कर जाती है ये मुश्किलें

कहना जब भी चाही मन की बात
कुछ अलग रुप मेँ आ जाती है ये मुश्किलें
क्या बताऊँ दोस्तों , मुझको
अलग-अलग अपने अंदाज दिखा जाती है ये मुश्किलें।

#सरितासृजना

सोचा

सोचा जमाने में बडी लूटपाट मची हुई है
महोब्ब्त कर लेते है यार,प्यार की दौलत को कौन लूट पायेगा।
खबर न थी मुझको तो मेरा यार ही दगा दे जायेगा।

बडा संभाला था अपनी चाहतों को,
छुपाकर रखा था अपनी ख्वाहिशों को,
खबर न थी हमको ये सच बताएं,
भरी महफिल में ही मुझको मेरा यार रुसवा कर जायेगा।

अब तो झोली खाली-खाली सी है अरमानों की,
दुआँओं की आज बहुत जरुरत है मुझको ऐ मेरे मालिक,
खबर क्या थी हमको कि मेरा यार ही मुझको बद्दुआ दे जायेगा।

#सरितासृजना

पुरवाई

देखो कितनी सुंदर पुरवाई है
लगता है गलती से मेरे घर चली आई है
आई होगी पडोस के घर
दरवाजे एक से है ना हमारे।

आई है तो आजा बैठ पास हमारे
बातें कर लेँ दोचार प्यारी-प्यारी
बाँट लूँ तुझ संग मैं अपने गम सारे
बहुत समय हुआ ,
अच्छा समय बिताएँ।

तू बंधनोँ से परे आजाद फिरा करती है
और मेरी रुह तो इस जिस्म की जेल मेँ
हर लमहा तड़पा करती है
कितना अच्छा हो गर मैँ आजाद हो जाऊँ।

अदृश्य बेड़िया है मेरे पैरों में
जब भी मुक्त होना चाहा उभर आती है
जीवन के जंजालों के रुप में
थम सा जाता बस वही पर सब।

मन की आशायें तुझको छूने को
हरदम ललयित रहती है बहुत
मेरा बस नही है ऐ पुरवाई!
वर्ना तेरी गोद में मैं सदियों तलक है सो जाऊँ।

#सरितासृजना

चंद टुकडे

1) तुझसे मिलकर मैं,मैं ना रही
और, तुम भी तो ना हो सकी मैं।

2)लिखनेवाले तूने भी क्या कमाल लिखा है,
मेरी किस्मत में हर पल एक सवाल लिखा है।

3) दर्पण में तस्वीर कैद नही होती,
हाँ, जो सच हो वो कभी-कभी नही दिखता।

4) बच्चों का मन निर्मल होता
बातों से भी बहल जाते है।
मुठ्ठी में गर करो कैद
जुगनूओं और तितलियों को
वो बेजुबान अपना दम तोड जाते है।

5)कभी-कभी शब्द पन्नों पर यूँ ही बिखर से जाते है
स्याही भी क्या करे जब आँसू यूँ ही ढल से जाते है
कागज बस धीरे से ज्युँ ,युँ ही रँग जाते है।
उसके सीने में ना जाने, कब चुपचाप से ये बूँदे उतर जाते है।

#सरितासृजना

“माँ”

“माँ”

सिर्फ एक शब्द मगर ,

जिसमें पूरा संसार समाया हुआ है।

माँ की तुलना किसी से करना मतलब ,

उनकी अहमियत को कम करना।

“माँ” आप अतुल्य है।

#सरितासृृजना

“नजर आते है”

रिश्तों के धागे कभी कमजोर दिखते,
कभी, मजबूत नजर आते है।

निर्णयों की घड़ी में कभी अपने दिखते,

कभी, अपने पराये नजर आते है।

जब चाहिए होता एक सबल सहारा,

इक ओर हम, इक और लोग नजर आते है।

पल में अनजान बन जाता कोई अपना,

और कभी,पल में पराये अपने से नजर आते है।

बदलती है किस्मत, या बदल वक्त जाता है,

लोग कभी-कभी, हतप्रभ से नजर आते है।

#सरितासृजना