जो साथ है उसे तू भूला चला,
जो दे गया दगा उसपर है तू फ़िदा।
वाह री दुऩिया, तेरी अनोखी रीत है,
क्या कहूँ इसे ये हार है कि ये जीत है।

हर चमकती चीज़ सोना नही होती, ऐ दोस्त,
कभी-कभी ख़ुबसूरत फूलों में भी महक नही होती, ऐ दोस्त।
क़द्र उनकी करो जो साथ निभाते है ताउम्र,
उन्हें भूल जाना ही बेहतर जो पलटकर नही आते है।

कभी फ़लक तो कभी ज़मी बस एक ही तो है हासिल,
ना लगा उसको गले जो हो सकता है हो, नाकाबिल।

अभी धुँधला कोहरा है छाया हुआ दिलो-दिमाग पर,
पलटी थी नजर, बहुत दूर से आती कभी उसी आवाज पर।
पास आने पर सारे “भ्रम” हैं बिखर से गये थे, बहुत पहले ही,
तस्वीर पर उसकी इबादत के आँसू बह गये थे, बहुत पहले ही।

#सरितासृजना

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