1) ना रोको शब्दों को आज
इन्हें कागज पर बह जाने दो।
दर्द को दर्द से लिपटकर ऐ मेरे दोस्त
आज , खूब रो जाने दो।

2) आग सिर्फ जिस्मों को राख करती है
रूहें कहाँ जला करती है
खुद से कर वफा ऐ बंदे
कभी ठोकर तू ना खायेगा।

3) सपनों में बसे हो जिनके
जब चाहे पहुँच जाते हो करीब
उनको है शर्म हमारे करीब आने में
मगर हिचकियों पर तो कोई बंदिश नही है
ऐ मेरी जानिब ,जब जी चाहे हमको सताने में।

#सरितासृजना

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