अंबर से बरस रहा है देखो “पानी”।

इस प्यासी धरती की प्यास बुझा रहा है देखो “पानी”।

जीवन में अपनी महत्ता को समझा रहा है देखो “पानी”।

इंसा को कद्र नही उसकी इस बात को भी बता रहा देखो “पानी”।

कमी मेरी हो जायेगी तब तरसोगे ये भी जता रहा है देखो “पानी”।

सहेज लो मुझे ,संचय कर लो मुझे बार-बार यही दोहरा रहा है देखो “पानी”।

मुझसे ही जीवन है ये ना भुलो, ऐ इंसानों हर बार यही याद दिला रहा है देखो “पानी।”

#सरितासृजना

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