रिश्तों के धागे कभी कमजोर दिखते,
कभी, मजबूत नजर आते है।

निर्णयों की घड़ी में कभी अपने दिखते,

कभी, अपने पराये नजर आते है।

जब चाहिए होता एक सबल सहारा,

इक ओर हम, इक और लोग नजर आते है।

पल में अनजान बन जाता कोई अपना,

और कभी,पल में पराये अपने से नजर आते है।

बदलती है किस्मत, या बदल वक्त जाता है,

लोग कभी-कभी, हतप्रभ से नजर आते है।

#सरितासृजना

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