इक पूजे चाँद ,इक पूजे सूरज,

क्यों दोनों मिलकर दोनों को नही पूजते ?

कोई जारी करे फतवा (मौलवी)

कोई माँगे माफीनामा (धर्मगुरु)

क्यों, क्यों, क्यों ??

बीच का उपाय सब मिल क्यों नही सोचते?

जीवन से ऊपर धर्म क्यों है समझते ?

इंसानियत से बढकर खोखले रिवाजों की अहमियत क्यों है समझते?

जो गलत है अब उसको बदलो,

वक्त नया है दोस्तों, अब तो सँभलो,

जो रुक जाता है वो थम जाता है,मिट जाता है,

जो बदल जाता है यारों,वो निखर जाता है।

निरंतर बदलाव जरुरी है,

देखो, सोचो,ऐ मेरे दोस्तों,

प्रगति में हमारी कितनी ही मनसाएँ अधूरी है।

#सरितासृजना

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