आज एक सपना देखा,

सपने में कोई एक और सपना देखा,

हाँ मैंने आज एक सपना देखा।

सोचती हूँ क्यों मैँ बडी हुई,

क्यों ना मैँ बच्ची ही रही,

छोटी थी तो अच्छा ही था,

कम सपने थे, या सपने ही नही थे।

चाहते भी तो कम ही थी,

उम्मीदें भी ना किसी से थी,

बस थोडी सी खुशी भी काफी थी,

चिंतामुक्त होकर सो जाने को,

ममता की गोद ही काफी थी।आज एक सपना देखा……

कुदरत के नियमों में पैदा होना और बढना लिखा है,

थोडा हँसना, थोडा रोना और फिर,

इन हवाओं में इक दिन,

बनकर धुआँ उड जाना लिखा है।

डर लगता है अपने लिए नही, अपनों के लिए,

सोना चाहती हूँ आराम और चैन की नींद,

मगर सपनों के लिए नही,

संघर्ष कभी-कभी थका देता है मगर,

जूझना पडता है जीवन के हर क्षण से।

आज एक सपना देखा,

सपने मेँ कोई एक और सपना देखा,

हाँ मैंने आज एक सपना देखा।

#सरितासृजना

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