मन वीणा के तारों में छुपा कोई

संगीत नया गर हाँ कह दो तो,

कोई गीत नया फिर से मैं गुनगुनाउँ “प्रिय”।

मन की गिरह में है संजोये कितने ही,

गुलाबी सपने गर हाँ कह दो तो,

कोई इक स्वप्न नया फिर से मैं सजाउँ “प्रिय”।

सुबह-सवेरे मन जब हो जाये व्याकुल,

समय-सारिणी से गर हाँ कह दो तो,

कोई नया इक पल फिर से और मैं चुराउँ”प्रिय”।

इच्छाओं की गठरी बाँधी और ले चला हूँ मैं,

कदम-कदम पर गर हाँ कह दो तो,

तुम संग जीवन अपना नया फिर से मैं सजाउँ “प्रिय”।

#सरितासृजना

Advertisements