आज कलम ने एक सवाल किया ,

तूने जब भी लिखा दूसरों को लिखा ,

क्या खुद से नावाकिफ है तू।

जब भी सोचा तो ख्यालों मेँ ,

किसी और को सोचा, इतना क्यूँ,

औरो पर मेहरबाँन है तू।

खुद से ज्यादा दुसरोँ पे एतबार,

ऐसी अजब सी कशमकश का

हर लम्हा ,लम्हा शिकार है तू। 

गुजारता है वक्त दुसरों को ढुढ़ँने में,

कभी खुद से भी तो मुलाकात कर,

क्यूंँ  खुद से  इतना बेजार है तू।

दुसरों के दर्द  की तुझको बडी  फ्रिक है

कभी  खुद के दर्द से भी तो  खुद को दोचार कर,

क्यूँ अपने ही जख्मों से इतना अनजान है तू।

#सरितासृृजना

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