लोग कहते है कि परछाईयाँ बेवफा होती है ,वो साथ कहाँ निभाती है। सिर्फ अधेंरों मेँ साथ होती है ,और उजालों में गुम हो जाती है।

परछाईयाँ सदा साथ निभाती है ,बस उजालों से डर सी जाती है। जब कोई आस-पास नही होता ,वही तो है जो चुपचाप अपना फर्ज निभा जाती है।

परछाईयाँ कुछ कहती-सुनती नही है,बस मूक सी इक हरकत सी नजर आती है। कभी महसूस किया है उसका साथ? उजाले जब भी आते है वो अपने घर को चली जाती है।

पर सोचा है कभी? जब भी अंधेरा छाने लगता है, बस वो ही तो है, जो अपनी वफा निभाने चली आती है।

#सरितासृृजना

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