जब तुमने कहना चाहा

सुनना हमने गँँवारा ना किया।

आज सुनने की ख़्वाहिश है और ,

तुम हो की ख़ामोश हुए जाते हो।

वक्त को इलज़ाम देते रहे हरदम,

खुद का बचाते रहे दामन हमेशा,

छिपते रहे यहाँँ-वहाँँ नजरोंं से तेरी,

ढुँँढते है अब तुमको जब,तुम गुम हुए जाते हो।

#सरितासृृजना

Advertisements