1)  एक तरफ बोझ ज़िम्मेदारीयोंं का ,

और एक तरफ है प्यार कलम औ किताबोंं का,

ऐ मौला मेरे ,क्योंं दिया हमको ये शौक नवाबोंं का।

2) ख़ताओंं से बडा पुराना है रिश्ता मेरा,

वफ़ाओं से मेरी कभी मुलाकात ही नही हुई।

3) जिंंदगी का फ़लसफ़ा कुछ ऐसा निकला ,

दर्द मेंं हमारा नंंबर यारोंं पहला निकला।

4) आसांं नही है हर पल को खुशी से गुजार देना,

अश्क भी तो बिन बुलाए मेहमांं से चले आते है।

5) ओ ब्रजवासिनी चल जायेगें गोकुलधाम,

मन मेरो वही बसत है जो कान्हा को गाम।

#सरितासृृजना

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