आज फिर से तेरे पास ना होने का,

हमको ये “अहसास” हुआ।

बहुत दूर है तू मुझसे,

आज फिर से मुझको ये विश्वास हुआ।

उम्र कितनी ही क्योंं न कट जाये मगर,

फासले न होगेंं कभी कम,

आज फिर से मेरे दिल को  ये एतबार हुआ।

दुनिया मेंं है कितने ही गम और गम के मारे,

उन लोगोंं मेंं भी अब तो हमारा नाम खूब ये शुमार हुआ।

रफ्ता-रफ्ता चल रही है जिंंदगी की घडी,

हर कोशिश, हर उम्मीद,हर लम्हा ,आज फिर से ये सब बेकार हुआ।

सज जाती थी महफिलेंं जिनके आने से जहाँँ,

उनके जाने से वहाँँ का जर्रा-जर्रा फिर से ये बेजार हुआ।

बहुत कम है लोग यहाँँ जिन्हेंं दिल और दुआ दोनोंं नसीब है,

हम वो बदनसीब है जिसे कभी  सौगात ना ये नजर हुआ।

#सरिता सृृजना

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