तेरे दिए मर्ज को लोग आज इलाज कहते है

तेरे गम मेंं लिखे अलफाजोंं को,

मेरी कलम का कमाल लोग कहते है।

तू दर्द के साथ जाते-जाते इक दुआ भी दे गया,

ऐ दोस्त,

महफिलोंं मेंं मेरे मशहूर हो जाने को,

तेरी दोस्ती का कमाल लोग कहते है।

बेहोशी के आलम मेंं मेरे,

कुछ भी अर्ज कर जाने को,

तेरे इश्क के जुनूँँ का कमाल लोग कहते है।

मयस्सर नही होता अब दीदार तेरा,

हर मुसाफिर मेंं तुझे ढुँँढने को,

करती हूँँ खुदा की बंंदगी कमाल लोग कहते है।

#सरितासृृजना

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