आज फिर एक नया फसाना लिखा है,

मुद्दतोंं के बाद वो ही किस्सा पुराना लिखा है।तेरे मेरे बीच घटी अनजानी गुस्ताखियोंं का,

वो ही अफसाना सुहाना लिखा है।

मिलकर जो हमने साथ था गुनगुनाया ,

वो ही तेरा मेरा तराना लिखा है।

वो बागोंं मेंं चहकना और बहकना,

मगर इक आहट पर वो हो जाना अनजाना लिखा है।

हुस्न पर मेरे हुए थे लाखोंं मेहरबांं,

मगर तेरा हो जाना वो ही गजब मस्ताना लिखा है।

हूए होगेंं आशिक कई और होगेंं आगेभी,

मगर तेरा वो ही अलग अंंदाज आशिकाना लिखा है।

कभी ना होगेंं वफा से बेवफा,सोचा था ,

मगर किस्मत का वो ही हम दोनोंं को भटकाना लिखा है।

जब तक ना देखती थी नजरेंं दिल रहता था बेताब ,

मगर सामने आजा ने पर,

वो ही तेरा शरमा जाना लिखा है।

दामन था मेरा हकदार जिन फूलोंं का,

उनको बदले मेंं काटोंं से वो ही भर जाना तेरा लिखा है।

हँँसी सपनोंं की जगह अब आँँसुओंं ने ले ली है,

आँँखोंं को हरपल वो ही तेरा रुला जाना लिखा है।

लिखूँँगी तुझपर कई बार ये सोचा था,

आज दिल ने नजर किया तुझको,

वो ही मेरा अंंदाज शायराना लिखा है।

#सरितासृृजना

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