क्युँँ दिल मेंं खिल उठे फूलोंं की महक 

को तुमसे ही छिपाये फिरते है,

अब होश को कहाँँ ढुँँढेंं हम,

हर वक्त एक नशा सा है जिंंदगी मैंं मेरी,

तेरे सपनोंं को अपनी आँँखोंं मेंं सजाये फिरते है।

दिनभर इंंतजार तेरे जवाब का रहता है,

पिछली बार जो तुमने कहा था,

उन्हींं बातोंं को सीने से लगाये फिरते है।

बार-बार देखते है तसवीर तुम्हारी,

तेरी चाहत मेंं है बर्बाद सितमगर हम तो,

एक तेरे लिए दुनियाभर की खुशियोंं को ठोकर लगाये फिरते है।

जुबांं ने मना कर रखा है राजे दिल बंंयान ना करो हमदम,

                   इसलिए

तुमसे ही नजरे चुराये फिरते है।

#सरितासृृजना

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