देश मेंं नोटबंंदी से पैदा हुए हालातोंं पर मन ने कुछ कहना चाहा है सब तो नही मगर थोडा सा शब्दोंं मेंं हालातोंं को समेटने की एक कोशिश ।

दुनिया का दस्तूर कुछ ऐसा अनोखा देखा

बड़े-बड़ो की भीड़ मेंं खुद को अकेला देखा।

कालेधन पर लोंंगो को रोते हुए एक सरीखा देखा

कैसे लगाये पैसोंं को ठिकाने

         एक से बढकर एक नया तरीका देखा।

किसी को आलीशान आफिसोंं मेंं बैठे नोट बदलते देखा

किसी को कड़कती धूप मेंं लम्बी कतारोंं मेंं सुलगते देखा।

हर पैसे वाले को मैने आज पैसोंं के लिए तरसते देखा

किसी कोज्यादा होने की आग से पहली बार सुलगते देखा।

किसी को डर और बैचेनी से परेशान होते हुए देखा

और किसी को आराम और सुकून से सोते हुए देखा।

किसी को “कम है तो क्या गम है” को कहते देखा

हर गरीब को हर अमीर पर आज मैंंने हँँसते हुए देखा।

#सरितासृृजना

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