चलो आज मिलकर कुछ खोते है

तुम अपना दिल खो दो

हम अपनी नींंद खोते है ,चलो आज मिलकर ….

तुम अपना करार खो दो

हम अपनी बेकरारी को खोते है ,चलो आज मिलकर….

तुम अपना गुरुर खो दो

हम अपना गुमान खोते है, चलो आज मिलकर …..

तुम अपनी मंंजिल खो दो

हम अपना मुकाम खोते है ,चलो आज मिलकर……

तुम अपने गुनाह खो दो 

हम अपनी गवाही को खोते है ,चलो आज मिलकर….

तुम अपनी धडकनेंं खो दो

हम अपनी साँँसोंं को खोते है, चलो आज मिलकर……

तुम अपनी जिंंदगी खो दो

हम अपनी मौत खोते है, चलो आज मिलकर…….

तुम अपना खुदा खो दो

हम अपनी बंंदगी को खोते है ,चलो आज मिलकर…..

तुम अपना दिन खो दो

हम अपनी रातोंं को खोते है ,चलो आज मिलकर…….

तुम अपना कफन खो दो

हम अपनी राख खोते है ,चलो आज मिलकर….

तुम अपनी बैंंचेनी खो दो

हम अपना चैंंन खोते है ,चलो आज मिलकर…….

तुम अपनी जमी खो दो

हम अपना आसमांं खोते है ,चलो आज मिलकर कुछ खोते है।

#सरितासृृजना

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