लिखूँँगी तुझको  फुर्सत से मगर ,जाने दो क्योंंकि

लिखने को अभी मेरा दिल नही है।

पँँहुचाऊगी तेरी कहानी को अंंजाम तक मगर ,जाने दो क्योंंकि

कोई नया मोड देने को अभी मेरा दिल नही है।

सुनाऊँँगी तेरी हकीकत जहाँँ को एक दिन मगर ,जाने दो क्योंंकि

तेरी बेवफाई बयांं करने को अभी मेरा दिल नही है।

सताने की सजा सोच रखती हुँँ मगर ,जाने दो क्योंंकि

तुझको रुसवा करने को अभी मेरा दिल नही है।

किश्तोंं मेंं सजा मिलेगी तुझको मगर ,जाने दो क्योंंकि

तुझको सजा देने को अभी मेरा दिल नही है।

मनाने की कोशिशोंं को ढुँँढ रखती हुँँ मगर, जाने दो क्योंंकि

तुझसे रुठ जाने को अभी मेरा दिल नही है।

मुश्किलेंं आसान नही होती मगर ,जाने दो क्योंंकि

तेरी मुश्किलोंं मेंं साथ देने का अभी मेरा दिल नही है।

ढुँँढते फिरोगे मुझको जो खो जाऊँँगी मगर ,जाने दो क्योंंकि

गुम हो जाने को अभी मेरा दिल नही है ।

#सरितासृृजना

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