सुना है “सरहद” के पार भी रहते है लोग !

क्या तेरे मेरे जैसे ही दिखते है वो लोग !

तेरी रग़ो मेंं बहता है “पाकिस्तान ”

मेरे भी दिल मेंं बसता है “हिंंदुस्तान “।

माँँयेंं तो वहाँँ भी होती होगी ?

दुआँँयेंं तो वहाँँ भी होती होगी ?

पूजा छोड़कर भाग जाता है मेरा “ओम ”

जब तेरा “अब्दुल”आवाज लगाता है।

क्या तेरा “अब्दुल” भी ऐसा करता है?

जब तू उसको नमाज़ पढ़ना सिखाता है।

अरे!ज़मींं तो तुझको और मुझको चाहिए

ओम और अब्दुल को तो प्यार भरी सिर्फ

एक हँसी चाहिए।

ऩादान है दोंंनो अभी कुछ समझते नही है ना!

वो सिर्फ प्रेम और स्नेह की भाषा समझते है ,नफ़रत तो तेरे और मेरे दिलोंं मेंं ही पलती है।

वो प्यार बाँँटकर खुशी से जीते है,और हम!

हम नफ़रतोंं के साये मेंं पल-पल मरते है ।

#सरितासृृजना

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