कंंचन काया,शीतल मन मेरे सपनोंं का विस्तार हो तुम

रुप सुहाना, चंंचल सा चितवन मेरी कल्पनाओंं का अविष्कार हो तुम

गज गामिनी, हृृदय कामिनी मेरी भावनाओंं का सुविचार हो तुम

दिल की धडकन, साँँसोंं की स्पंंदन मेरी वर्जनाओंं का एक गुबार हो तुम

एहसास कोमल ,साथ सुकोमल मेरा पूरे का पूरा संंसार हो तुम

#सरितासृृजना

Advertisements