ना नाम याद रहा ,ना मुकाम याद रहा

मुझको फखत, वो आखरी सलाम याद रहा।

ना कत्ल याद रहा, ना गुनाह याद रहा

मुझको फखत ,वो आखरी इलजाम याद रहा।

ना वक्त याद रहा, ना वो लमहा याद रहा

मुझको फखत ,वो आखरी जाम याद रहा।

ना प्यार याद रहा ,ना इसरार याद रहा

मुझको फखत, वो आखरी इकरार याद रहा।

ना टूटना याद रहा, ना वो बिखरना याद रहा

मुझको फखत ,वो आखरी बिलखना याद रहा

ना सिसकना याद रहा, ना धडकना याद रहा

मुझको फखत ,वो आखरी सिमटना याद रहा।

#सरितासृृजना

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