तीन तलाक पर आजकल माहौल बहुत र्गम है मुस्लिम समाज का यह एक ज्वलंत विषय बनकर उभरा है सायरा ने सुप्रीम र्कोट में यह सवाल खडे कर दिए है मुस्लिम समाज के सामने।

ये एक मुस्लिम महिला की बहादुरी है पर्दे से बाहर आकर समाज के ठेकेदारों को ललकारना काबिले तारीफ है।

तीन तलाक झेल चुकी मुस्लिम  महिलाओं को अब बाहर आना जरूरी हो गया है अपने हक के लिए ,अपने बच्चों के भविष्य के लिए।

एक सुरक्षित भविष्य की हकदार वे भी है मुस्लिम समाज इसे अपना अंदरूनी मामला बताकर दखल ना देने की हिदायत दे रहा है जो गलत है।

पढें लिखे मुस्लिम युवक-युवतियों को अपनी राय जाहिर करनी चाहिए  इस लडाई में औरतों का साथ देना चाहिए क्योंकि यह तलाक की आफत उनके घर का दरवाजा  भी कल खटखटा सकती है ।

यह तलाक का कहर उनकी माँ या बहन  पर भी बरपा हो सकता है ।​

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